लाल मिर्च: एक तीखी औषधि
लाल मिर्च का नाम सुनते ही ज़ुबान पर जलन और तीखापन महसूस होता है, है न? लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह तीखापन ही कई बीमारियों की दवा बन जाता है? आमतौर पर इसे हम सब्ज़ियों और खाने में स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करते हैं, लेकिन आयुर्वेद में लाल मिर्च का उपयोग कई तरह के घरेलू नुस्खों में किया जाता है। इसे कई जगह “लंका” भी कहा जाता है। अधपकी मिर्च हरी होती है और पकने के बाद यह लाल रंग की हो जाती है।
चलिए, जानते हैं कि लाल मिर्च किन-किन रोगों में कैसे लाभ देती है और इसे किस तरह से प्रयोग में लाया जा सकता है।
1. पेट दर्द (उदर शूल) में लाभकारी
पेट में अचानक होने वाले तेज़ दर्द को अक्सर लोग गैस या अपच समझ लेते हैं। लेकिन ऐसे समय में एक आसान घरेलू उपाय है – लाल मिर्च का चूर्ण और गुड़।
विधि:
- 100 ग्राम गुड़ लें।
- इसमें 1 ग्राम सूखी लाल मिर्च का महीन पाउडर मिलाकर छोटी गोली बना लें।
- यह गोली खाने से पेट के दर्द में तुरंत आराम मिलता है।
यह उपाय खासकर तब काम आता है जब आपको खाना ठीक से नहीं पच रहा हो या पेट में ऐंठन हो रही हो।
2. हैजा (विसूचिका) में उपयोगी
हैजा एक गंभीर रोग होता है जिसमें रोगी को बार-बार उल्टी और दस्त होते हैं। इसमें शरीर से पानी और लवण तेज़ी से निकलते हैं, जिससे कमजोरी आ जाती है।
उपचार:
- हर उल्टी या दस्त के बाद रोगी को आधा चम्मच लाल मिर्च का तेल पिलाएं।
- ऐसा दिन में 2–3 बार करने से रोगी को तेज़ी से आराम मिलने लगता है।
यह उपाय शरीर में ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद करता है।
3. खाज, खुजली और सूजन में राहत
त्वचा की समस्याओं जैसे खाज, खुजली, गठिया (संधि शोथ), श्वान या ततैया के काटने पर होने वाली सूजन में लाल मिर्च का तेल बहुत लाभकारी होता है।
उपयोग:
- प्रभावित स्थान पर हल्के हाथों से लाल मिर्च का तेल लगाएं।
- दिन में दो बार यह प्रक्रिया दोहराएं।
जलन थोड़ी देर हो सकती है, लेकिन इसके बाद खुजली और सूजन में काफी राहत मिलती है।
4. बच्चों में लकवा की आशंका में फायदेमंद
कई बार छोटे बच्चों को सर्दी-ज़ुकाम के बाद बुखार आता है और साथ ही पैरों में सुन्नता या कमजोरी महसूस होती है। यह लकवे का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है।
उपाय:
- सूखी लाल मिर्च को पीसकर महीन चूर्ण बना लें।
- इसमें थोड़ा तिल का तेल मिलाकर एक लेप जैसा बनाएं।
- इससे पैरों की हल्के हाथों से मालिश करें।
यह उपाय नसों की सुस्ती दूर करता है और रक्तसंचार बेहतर बनाता है।
5. मिर्च का तेल बनाने की विधि
लाल मिर्च का तेल बनाना आसान है और इसे आप घर पर ही तैयार कर सकते हैं।
सामग्री:
- सूखी लाल मिर्च – 125 ग्राम
- तिल का तेल – आधा किलो
विधि:
- एक मोटे तले की कढ़ाई में तिल का तेल गर्म करें।
- उसमें सूखी लाल मिर्च डालें।
- जब मिर्च काली पड़ने लगे (जले नहीं), तब गैस बंद कर दें।
- तेल को छानकर किसी शीशी में भर लें।
यह तेल कई रोगों में काम आता है और लंबे समय तक खराब नहीं होता।
6. फोड़े-फुन्सियों में आराम
बरसात या गर्मी के मौसम में त्वचा पर छोटे-छोटे फोड़े-फुन्सियां निकल आते हैं। इनमें जलन और खुजली होती है।
उपाय 1 (बरसात में):
- रोज़ाना मिर्च तेल की कुछ बूँदें भोजन के साथ लें।
- इससे शरीर के भीतर की गर्मी नियंत्रित होती है और फोड़े फुन्सी ठीक हो जाते हैं।
उपाय 2 (गर्मी में):
- लाल मिर्च के बीजों का तेल लें।
- फोड़े या फुन्सियों पर दिन में 2 बार लगाएं।
कुछ ही दिनों में त्वचा साफ़ और स्वस्थ दिखने लगती है।
7. गले के रोगों में राहत
गले में खराश, सूजन या घाव हो जाएं तो बोलने में दिक्कत होती है। गला बैठ जाना भी एक आम समस्या है।
उपाय:
- 1 लीटर पानी में 10 ग्राम पिसी हुई लाल मिर्च डालें।
(अगर मिर्च बहुत तीखी हो तो मात्रा 5 ग्राम रखें) - इस पानी को उबालकर काढ़ा बना लें।
- ठंडा करके इस पानी से कुल्ले करें।
इससे गले का घाव, मुखपाक, और अन्य संक्रमण दूर हो जाते हैं। यह उपाय रोज़ाना 2 बार करने से जल्दी असर करता है।
सावधानी और सुझाव
लाल मिर्च भले ही कई रोगों में उपयोगी हो, लेकिन इसका प्रयोग मात्रा और स्थिति के अनुसार ही करें। ज्यादा मात्रा में सेवन करने से पेट में जलन, एसिडिटी या मुँह में छाले हो सकते हैं।
महत्वपूर्ण बातें:
- बच्चों को बहुत थोड़ी मात्रा में ही दें।
- अगर किसी को मिर्च से एलर्जी है, तो इसका प्रयोग न करें।
- किसी भी नुस्खे को नियमित रूप से 2-3 दिन आज़माएं, अगर आराम न हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।
निष्कर्ष
लाल मिर्च सिर्फ रसोई की शोभा नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक औषधि भी है। इसके तीखे गुण कई बीमारियों में राहत देने वाले साबित हो सकते हैं। ध्यान से और सही तरीके से इसका उपयोग किया जाए, तो यह बहुत लाभकारी साबित हो सकती है।
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